
साहित्य विमर्श प्रकाशन
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अमरकांत का लेखन पाठक के समक्ष ज़िंदगी का बेलौस चित्र प्रस्तुत करता है पर, हिंदी साहित्यिक समाज द्वारा अभी भी उनको ढंग से समझा नहीं गया है।
‘अमरकांत: जीवन और साहित्य’ के प्रकाशन के पीछे उद्देश्य यही रहा है कि अमरकांत को सलीके से समझा जा सके। यह समझना केवल उनके साहित्य तक ही सीमित न रहे बल्कि उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं का भी हो जो अमरकांत को अमरकांत बनाते थे। इसीलिये इस पुस्तक में आलोचकों, लेखकों के अमरकांत पर लिखे लेखों के अलावा उनसे समय-समय पर लिये गए कुछ महत्वपूर्ण साक्षात्कार, उनसे जुड़े कुछ व्यक्तिगत संस्मरण और उनकी कुछ चर्चित कहानियों तथा उपन्यासों की समीक्षाओं समावेश किया गया है।
उम्मीद है इससे जहाँ पाठकों को अमरकांत को सम्पूर्णता में समझने में मदद मिलेगी, वहीं उन पर शोध करने वाले छात्रों को भी सुविधा होगी।
सुनील श्रीवास्तव .शिक्षा – एम्.ए. ( भूगोल , इलाहाबाद विश्वविद्यालय ) एल.टी. ( सेन्ट्रल पेडागाजिकल इंस्टिट्यूट, इलाहाबाद )१९७२ से माया पत्रिका से पत्रकारिता की शुरुआत .माया , नूतन कहानियां ,धर्मयुग ,हितवाद ,ज्ञानयुग प्रभात ,प्रभात खबर ,लोकमत समाचार ,राजवार्ता ,मनोरमा आदि पत्र- पत्रिकाओं के सम्पादकीय विभाग में विभिन्न पदों पर कार्य किया प्रभात खबर , लोकमत समाचार , राजवार्ता एवं मनोरमा का सम्पादक था . इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर आफ मीडिया स्टडीज में बारह वर्षों तक पत्रकारिता का अध्यापन .रांची विश्वविद्यालय ,माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ,भोपाल ,उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी , इलाहाबाद ,भारती विद्या भवन आदि पत्रकारिता संस्थानों में बतौर अतिथि अध्यापन ताकि सनद रहे ,खोया हुआ ठहराव ,( कहानी संग्रह ) नदी को बहने दो ,( उपन्यास ) सड़क में तब्दील होती पगडंडियाँ( कविता संग्रह ).प्रकाशित
| Weight | 350 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 17 × 3 cm |
| फॉर्मैट | पेपरबैक |
| भाषा | हिंदी |
| Number of Pages | 407 |
Amarkant: Jeevan Aur Sahitya

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