कहते हैं, ज़िंदगी तब सबसे दिलचस्प होती है जब वो आपकी सोच से कुछ अलग ही हो , और यही हुआ तुहिना, उर्फ़ तनु के साथ।
पढ़ी-लिखी, सधी-संभली, लेकिन अपने ही रंग-रूप को लेकर हमेशा झुंझलाने वाली तनु को सजना-सँवरना बोरियत लगता है। उसे पसंद है किताबों की खुशबू, बाइक की रफ्तार और बहस का रोमांच !
लेकिन जब उसकी ज़िंदगी में आता है अग्नि, एक सीधा-सादा सब्ज़ी वाला , तब सब कुछ गड़बड़ा जाता है …. या फिर सब सही हो जाता है ।
“ऐ ज़िंदगी” एक ताज़ा, मुस्कुराहट भरी कहानी खुद तनु कि जुबानी , जहाँ प्यार न तो फिल्मों जैसा है, न परियों जैसा, बस थोड़ा अनोखा, थोड़ा हक़ीक़त जैसा।
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