‘फिर मिलोगी’ (Phir Milogi) सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं है, यह उस अनकहे मोह का आख्यान है जो जीवन की भीड़ में खोकर भी स्मृतियों में जीवित रहता है। वसुधा की शादीशुदा ज़िंदगी में सूनापन है, लेकिन उसका दिल एक ऐसे एहसास में उलझा है जो बरसों पहले किसी ट्रेन यात्रा में मिला था—एक ऐसा संयोग जो कल्पना-सी प्रतीत होता है, लेकिन दिल से मिटता नहीं।
मधु चतुर्वेदी (Madhu Chaturvedi) की लेखनी संवेदना, सौंदर्य और स्त्री-मन की महीन परतों को गहराई से उकेरती है। उपन्यास भाषा में बहता है, दृश्य रचता है और पाठक के भीतर एक हूक छोड़ जाता है। यह किताब उन सबके लिए है जिन्होंने कभी किसी को खोया है, लेकिन भुला नहीं पाए।
मधु चतुर्वेदी :
अँग्रेज़ी और हिंदी साहित्य में गोल्ड मेडलिस्ट। अँग्रेज़ी साहित्य में एम.फिल.। पाँच सालों तक डी.ए.वी. में अध्यापन।
समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में लेख, कविताएँ और संस्मरणों का लगातार प्रकाशन। रचनाओं के मराठी, पंजाबों और कश्मीरी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित। इनका फेसबुक पेज हिंदी लेखन के सर्वाधिक लोकप्रिय पेजों में से एक। इससे पहले इनका कहानी-संग्रह ‘मन अदहन’, उपन्यास ‘धनिका’ एवं ‘द्विवेदी विला’ पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय।
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