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नब्बे के दशक के पहाड़ी कस्बे में, स्कूल की घंटियों और प्रार्थनाओं के बीच जन्म लेती है एक मासूम-सी प्रेमकहानी। कृष्ण – गलतफहमियों, टूटते रिश्तों और किशोरावस्था की भटकन से जूझता हुआ लड़का; और श्रावणी-शांत, संवेदनशील, अपने अकेलेपन और कस्बे की अफ़वाहों के बीच खड़ी लड़की।
पहली नज़र का आकर्षण धीरे-धीरे भरोसे, चाहत और दर्द में बदलता है। यह उपन्यास सिर्फ़ स्कूलवाला इश्क़ नहीं, बल्कि उस उम्र का सच है जहाँ हर भावना गहरी होती है और हर गलती भारी पड़ती है।
‘वही छोटा-सा तिरछा दाँत’ (Wahi Chhota-Sa Tirchha Daant) यादों, पछतावे और पहले प्यार की वह कहानी है, जो मुस्कुराते हुए भी भीतर तक चुभ जाती है।
राम ‘पुजारी’ इंजीनियर हैं और दिल्ली की एक औद्योगिक इकाई कंसल्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में- अधूरा इंसाफः एक और दामिनी, लव जिहाद : एक चिड़िया, देव-भक्तिः आस्था का खेल, कुलदेवता का रहस्य (उपन्यास); अन्नु और स्वामी विवेकानंद, अन्नु और श्रीरामकृष्णदेव, अन्नु और माँ सारदा देवी (बाल रचनाएँ), रानी साहिबा (कहानी संग्रह) और काम्बोजनामा : किस्सा किस्सागो का (वरिष्ठ लेखक वेद प्रकाश काम्बोज की बायोग्राफी व लेखन यात्रा) शामिल हैं, जो पाठकों के बीच में बेहद लोकप्रिय हुई हैं।
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