. श्री जयशंकर प्रसाद का कामायनी में का कथन है —हार बैठे जीवन का दाव जितते जिसको मरकर वीर।। यह पुस्तक उन लोगों के लिए वरदान है जो यह सोचते हैं कि हम गांव की मिट्टी में रहकर कुछ नहीं कर सकते। यह उन भटके हुए युवाओं के लिए मार्गदर्शन है जिन्होंने जीवन के मूल्य को नहीं समझा है। यह पुस्तक पथ प्रदर्शक है जीनहें जीवन में आगे बढ़ाना है।बहुत ही सराहनीय तूलिका है मिश्रा जी की बहुत-बहुत साधुवाद
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Gaon Ki Mitti Mitne Nahin Deti
गाँव की पगडंडियों से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुँचने की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि जड़ों से जुड़े रहने की गहरी चेतना है। गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती एक संवेदनशील संस्मरण है, जिसमें लेखक सांता नंद मिश्रा अपने बचपन, संघर्ष, शिक्षा, विदेश प्रवास और जीवन मूल्यों को आत्मीयता के साथ साझा करते हैं। यह पुस्तक बताती है कि आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच भी अपनी मिट्टी की खुशबू इंसान को बार-बार पुकारती है। परिवार के संस्कार, गुरुजन का मार्गदर्शन और गाँव की सामूहिकता किस तरह एक साधारण बालक को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति देती है—यह कथा उसी का जीवंत प्रमाण है। प्रेरणा, स्मृति और आत्मचिंतन से भरी यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ने का संदेश देती है। यह उन सभी के लिए है जो जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, पर अपनी पहचान को खोना नहीं चाहते।
. Arun Kumar Pandey –
. श्री जयशंकर प्रसाद का कामायनी में का कथन है —हार बैठे जीवन का दाव जितते जिसको मरकर वीर।। यह पुस्तक उन लोगों के लिए वरदान है जो यह सोचते हैं कि हम गांव की मिट्टी में रहकर कुछ नहीं कर सकते। यह उन भटके हुए युवाओं के लिए मार्गदर्शन है जिन्होंने जीवन के मूल्य को नहीं समझा है। यह पुस्तक पथ प्रदर्शक है जीनहें जीवन में आगे बढ़ाना है।बहुत ही सराहनीय तूलिका है मिश्रा जी की बहुत-बहुत साधुवाद