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Gaon Ki Mitti Mitne Nahin Deti
गाँव की पगडंडियों से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुँचने की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि जड़ों से जुड़े रहने की गहरी चेतना है। गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती एक संवेदनशील संस्मरण है, जिसमें लेखक सांता नंद मिश्रा अपने बचपन, संघर्ष, शिक्षा, विदेश प्रवास और जीवन मूल्यों को आत्मीयता के साथ साझा करते हैं। यह पुस्तक बताती है कि आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच भी अपनी मिट्टी की खुशबू इंसान को बार-बार पुकारती है। परिवार के संस्कार, गुरुजन का मार्गदर्शन और गाँव की सामूहिकता किस तरह एक साधारण बालक को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति देती है—यह कथा उसी का जीवंत प्रमाण है। प्रेरणा, स्मृति और आत्मचिंतन से भरी यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ने का संदेश देती है। यह उन सभी के लिए है जो जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, पर अपनी पहचान को खोना नहीं चाहते।
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