Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.
Media Life (मीडिया लाइफ)
मीडिया लाइफ में जो कथा-सन्दर्भ है वो अपनी कल्पनाशीलता के बावजूद न्यूजरूम और कारोबारी मीडिया के उस चरित्र का खाका खींच पाने में पूरी तरह कामयाब है, जिनका समाज का बड़ा वर्ग आकलन तो करता है लेकिन अन्दरखाने की बातें इस तरह उनके सामने नहीं आ पातीं। उपन्यास में मीडिया और न्यूजरूम की अश्लीलता, फूहड़ता, बेशर्मी और अमानवीय पक्ष मजबूती से उभर आते हैं। भाषा का आकर्षण ऐसा है कि किताब कहीं भी बोझिल नहीं लगती। यह उपन्यास भविष्य के लिए अब एक सन्दर्भ की तरह है। —विनीत कुमार मीडिया लाइफ की शुरुआत काफी मजेदार है। पूरी कहानी मीडिया पर लिखे व्यंग्य को सार्थक करती है। किताब में चैनलों की प्रतिद्वंद्विता, खबरों की तोड़-मरोड़ आदि को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। कहानी विभिन्न परिस्थितियों में मीडिया द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति और खबरों के मैनिपुलेशन को दर्शाती है। —नवीन चौधरी
Reviews
There are no reviews yet