लोकभारती प्रकाशन
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मार्कण्डेय की प्रतिनिधि कहानियाँ
‘गुलरा के बाबा’ संग्रह की कहानियों का समय आज़ादी के ठीक बाद का है। सामाजिक सन्दर्भों का वास्तविक चित्रण कहानियों का प्रमुख तत्त्व है। जीवन का सुख-दु:ख ही कहानियों का विषय है। भारत के नए निर्माताओं के सामने देश की वास्तविक तस्वीर कहानियों में प्रस्तुत की गई है। कहानियों में कोमल संवेदनाएँ, लुभावनी भाषा के साथ आक्रोश से भरी तीखी सामाजिक दृष्टि भी है। गाँव के जीवन का नया धरातल इस संग्रह का प्राण है। यहाँ जीवन की वास्तविकता के साथ उसमें परिवर्तन की आकांक्षा साथ-साथ है।
मार्कण्डेय हिन्दी के कथाकार और उपन्यासकार हैं। अपनी कहानियों और उपन्यासों में भारतीय ग्राम्य जीवन और उससे जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से दर्शाया है।
सेमल के फूल, अग्निबीज उनके प्रमुख उपन्यासों में से एक हैं।
| Weight | 150 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |


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