कवर प्रिंटिंग आदि बेहतरीन है सभी प्रकाशन मंडल को साधुवाद
Rated 3 out of 5
Nitin Khatri (verified owner)–
Boring pocket books struggle.
Rated 5 out of 5
Yogesh gandas (verified owner)–
मैने सुरेंद्र मोहन पाठक जी की इससे पहले आई तीनो ही आत्मकथा की किताब पढ़ी है। और हर बार मैं किताब पढ़ कर हैरान हूं कि इतनी अच्छी आत्मकथा मैने किसी भी लेखक की नहीं पढ़ी है। उनकी किताब जानकारियों से भरी हुई है और जीवन के बीतते दौर को जिस लय में उन्होंने लिखा है वैसा अनुभव मैने किसी भी आत्मकथा में नहीं हुआ है। वे भारत के सबसे अच्छे लेखकों में से एक है आज भी जब वे वृद्ध है लेखन उतना ही अच्छा रहा है। वे भारत में बीते समय का अच्छा खासा दौर दिखाती किताब के जरिए हमे लय बंद करते है। समय के साथ भारत के प्रकाशन में आए बदलाव और ऊंचा नीचा समय का यह किताब सभी चारो किताबों जैसी एक बहुमूल्य आत्मकथा है। मैं सुरेंद्र मोहन जी का बड़ा प्रशंसक हूं। और चाहता हूं वे ऐसे ही लिखते रहे अंत में उनकी तस्वीरो की भी मै तहे दिल से प्रशंसा करता हूं जीने शायद लेखक ने बड़े ही संभालकर रखा होगा।
Rated 5 out of 5
Ashwani Gupta (verified owner)–
जब से पाठक जी को पढ़ना शुरू किया है और किसी का पसन्द कम ही आता है । इस बार भी बढ़िया लिखा । पांचवे पार्ट का इंतज़ार रहेगा ।
Rated 5 out of 5
Naveen Bhati –
शानदार
लेखक द्वारा हुबहू उस वक्त का उन चीज़ों का खाका खींचा गया है । पढ़के आदमी उसी में खो जाता है
बेहद खूबसूरत
Rated 4 out of 5
Ravi Adwani (verified owner)–
Page no 294 to 338 matter was repeat as it was already read in various lekhkias.
Rated 5 out of 5
Ketan Kharbade (verified owner)–
Very good
Rated 5 out of 5
Yogesh Pal (verified owner)–
Excellent
Rated 5 out of 5
Amarjeet Dhillon (verified owner)–
A Gem from SMP sir as Always
Rated 5 out of 5
Usha Book Center (verified owner)–
good
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Pani Kera Budbuda | पानी केरा बुदबुदा
टॉप मिस्ट्री राइटर
सुरेन्द्र मोहन पाठक
की आत्मकथा का चौथा खंड
उपन्यास से ज्यादा रोचक।
हर वाकया जैसे आपकी अपनी आपबीती।
लुगदी पॉकेट बुक्स के विलुप्त व्यवसाय
के कई स्याह सफेद वाकये।
लेखक के उस दौर के पाठकों से
आपका सीधा डायलॉग।
ये खंड पढ़ते वक्त लेखक कभी आप को
सुनील लगेगा, कभी सुधीर लगेगा
तो कभी विमल लगेगा।
एक अद्भुत अहसास।
आदि से अंत तक रोचक आत्मकथा खंड–4
साहित्य विमर्श प्रकाशन
की संग्रहणीय प्रस्तुति
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,
अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं;
तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा,
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं।
सुरेन्द्र मोहन पाठक का जन्म 19 फरवरी, 1940 को पंजाब के खेमकरण में हुआ था। विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय दूरभाष उद्योग में नौकरी कर ली। युवावस्था तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेखकों को पढ़ने के साथ उन्होंने मारियो पूजो और जेम्स हेडली चेज़ के उपन्यासों का अनुवाद शुरू किया। इसके बाद मौलिक लेखन करने लगे। सन 1959 में, आपकी अपनी कृति, प्रथम कहानी “57 साल पुराना आदमी” मनोहर कहानियां नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई।
आपका पहला उपन्यास “पुराने गुनाह नए गुनाहगार”, सन 1963 में “नीलम जासूस” नामक पत्रिका में छपा था। सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रसिद्ध उपन्यास असफल अभियान और खाली वार थे, जिन्होंने पाठक जी को प्रसिद्धि के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया। इसके पश्चात उन्होंने अभी तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
उनका पैंसठ लाख की डकैती नामक उपन्यास अंग्रेज़ी में भी छपा और उसकी लाखों प्रतियाँ बिकने की ख़बर चर्चा में रही। उनकी अब तक सवा तीन सौ से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका नवीनतम उपन्यास विमल सीरीज का ‘सुपर डॉन’ है।
उनसे smpmysterywriter@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है। पत्राचार के लिये उनका पता है : पोस्ट बॉक्स नम्बर 9426, दिल्ली – 110051.
Raj singh (verified owner) –
Superb
Syed asif (verified owner) –
Pathak ji is the best
Jaspreet Singh (verified owner) –
Excellent memoir by my favourite
Vijay Singh (verified owner) –
कवर प्रिंटिंग आदि बेहतरीन है सभी प्रकाशन मंडल को साधुवाद
Nitin Khatri (verified owner) –
Boring pocket books struggle.
Yogesh gandas (verified owner) –
मैने सुरेंद्र मोहन पाठक जी की इससे पहले आई तीनो ही आत्मकथा की किताब पढ़ी है। और हर बार मैं किताब पढ़ कर हैरान हूं कि इतनी अच्छी आत्मकथा मैने किसी भी लेखक की नहीं पढ़ी है। उनकी किताब जानकारियों से भरी हुई है और जीवन के बीतते दौर को जिस लय में उन्होंने लिखा है वैसा अनुभव मैने किसी भी आत्मकथा में नहीं हुआ है। वे भारत के सबसे अच्छे लेखकों में से एक है आज भी जब वे वृद्ध है लेखन उतना ही अच्छा रहा है। वे भारत में बीते समय का अच्छा खासा दौर दिखाती किताब के जरिए हमे लय बंद करते है। समय के साथ भारत के प्रकाशन में आए बदलाव और ऊंचा नीचा समय का यह किताब सभी चारो किताबों जैसी एक बहुमूल्य आत्मकथा है। मैं सुरेंद्र मोहन जी का बड़ा प्रशंसक हूं। और चाहता हूं वे ऐसे ही लिखते रहे अंत में उनकी तस्वीरो की भी मै तहे दिल से प्रशंसा करता हूं जीने शायद लेखक ने बड़े ही संभालकर रखा होगा।
Ashwani Gupta (verified owner) –
जब से पाठक जी को पढ़ना शुरू किया है और किसी का पसन्द कम ही आता है । इस बार भी बढ़िया लिखा । पांचवे पार्ट का इंतज़ार रहेगा ।
Naveen Bhati –
शानदार
लेखक द्वारा हुबहू उस वक्त का उन चीज़ों का खाका खींचा गया है । पढ़के आदमी उसी में खो जाता है
बेहद खूबसूरत
Ravi Adwani (verified owner) –
Page no 294 to 338 matter was repeat as it was already read in various lekhkias.
Ketan Kharbade (verified owner) –
Very good
Yogesh Pal (verified owner) –
Excellent
Amarjeet Dhillon (verified owner) –
A Gem from SMP sir as Always
Usha Book Center (verified owner) –
good