Roopantaran | रूपांतरण
उसके जीवन में दहशत की आमद तब हुई, जब तेज तूफ़ान वाली एक रात किसी अजनबी ने सदियों पुराने दस्तावेजों के साथ उसके दरवाजे पर दस्तक दी और खुद को लाइकेनथ्रोपी पर रिसर्च कर रहा प्रोफ़ेसर बताते हुए उससे मदद की गुहार लगाई। प्रोफ़ेसर का दावा था कि अगर उसकी खोज मुकम्मल हो जाती है तो पूर्णमासी की रात दरिंदा बनने वाले इंसानों का इलाज संभव हो जाएगा मगर न तो उसे और न ही प्रोफ़ेसर को ये अनुमान था कि वह खोज उन खौफ़नाक रहस्यों के खुलने का सबब बन सकती थी, जिनका रहस्य बने रहना ही मानव के लिए हितकारी था।
चंद्र प्रकाश पांडेय ने हिंदी हॉरर साहित्य में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। हिंदी के हॉरर में प्रचलित थीम से हटकर वह नवीन विषयों को लेकर प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। मौत के बाद, महल, आवाज उनकी कुछ प्रचलित रचनाएँ हैं।
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