पेंगविन बुक्स
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द्वारकानाथ टैगोर इतने बड़े ज़मींदार थे कि जब वे लंदन पहुँचे, तो महारानी विक्टोरिया ने उन्हें प्राइवेट डिनर पर बुलाया, इंग्लैंड का अगला प्रधानमंत्री उनका दोस्त बनना चाहता था। उन्हीं द्वारकानाथ को उनकी पत्नी ने ही घर में घुसने नहीं दिया और उनके पोते रबींद्रनाथ टैगोर ने तो अपने दादा के सारे दस्तावेज़ जलाकर ख़त्म कर दिए।
इसी तरह, जिस समय टैगोर और गांधी में वैचारिक युद्ध चरम पर था, उसी समय गुरुदेव की भांजी सरला देवी ने गांधी के लिए खादी से बनी साड़ियों की मॉडलिंग शुरू की, जबकि बापू अपनी पत्नी कस्तूरबा तक को खादी की साड़ियाँ पहनने के लिए नहीं मना पाए थे।
प्लासी का युद्ध हो या पृथ्वीराज कपूर को हिंदी सिनेमा में ब्रेक दिलवाना, औरतों का आधुनिक तरीके से साड़ी पहनना हो या बेझिझक बिकिनी पहनना, भारत के समाज को बदलने वाली तमाम घटनाओं में टैगोर परिवार किसी न किसी तरह से शामिल रहा है।
अनिमेष मुखर्जी की यह किताब देश के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर के कुटुंब को जोड़ते हुए इतिहास की कुछ ऐसी घटनाओं और कालजयी प्रेम कहानियों का दस्तावेज़ है, जहाँ क़िस्से हक़ीक़त से ज़्यादा दिलचस्प हैं।
अनिमेष मुखर्जी जन्मना ‘भॉद्रो लोक’ से हैं, मुंबई में रहते हैं, किंतु जड़ें उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद में हैं। जब लगा कि ‘पॉवरपॉइंट’ से आगे जहाँ और भी हैं, तो एमबीए के बाद हिंदी साहित्य पढ़ने लगे। कई सालों तक मीडिया में काम करने और अपनी डॉक्यूमेंट्री मलेठा अनक्रश्ड के लिए पुरस्कार जीतने के बाद, फ़िलहाल बड़ी टेक कंपनियों के कॉन्टेंट को हिंदी और भारत के अनुरूप बनाने का काम कर रहे हैं। सिनेमा, भोजन के इतिहास, और टेक्नोलॉजी पर पढ़ने का शौक़ है और इन विषयों पर नियमित लिखते रहते हैं। साथ ही, पटकथा-संवाद लेखन में भी सक्रिय हैं।
Weight | 200 g |
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Dimensions | 20 × 15 × 2 cm |
फॉर्मैट | पेपरबैक |
भाषा | हिंदी |
Number of Pages | 224 |
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