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साहित्य विमर्श प्रकाशन

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पाठकों की राय

1 review for The Civil Serpents (Hindi)

  1. Avatar of Prabhat Datta Jha

    Prabhat Datta Jha

    पुस्तक के बारे में
    श्री विनय प्रकाश तिर्की जी की नई हिंदी पुस्तक “दि सिविल सर्पेन्ट्स”, साहित्य विमर्श प्रकाशन, गुड़गांव द्वारा प्रकाशित, निश्चित ही आज के सामाजिक और प्रशासनिक परिदृश्य को अद्भुत गहराई से उजागर करती है। वे अपनी पहचान को सिर्फ सरकारी पद या अधिकार तक सीमित नहीं रखते, बल्कि लेखन का संसार उनकी असली आत्मा और स्वरूप को अभिव्यक्त करता है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी ताकत यही है कि लेखक ने अपने अनुभवों को केवल “रिपोर्टिंग” के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि हर शब्द में संवेदनाओं की लगन और गहराई पूरी ईमानदारी से उतारी है।

    किताब की शैली सहज, सरल और शालीन है—फिर भी पृष्ठ दर पृष्ठ एक फुंफकारता सा आक्रोश महसूस होता है, जो सत्ता की राजनीति और अतृप्त समाज का प्रतीक बना रहता है। लेखन में निडरता और अपने जीवन के भीतर तक जाने की हिम्मत साफ झलकती है। अंग्रेजी संस्करण “The Civil Serpents” को पढ़ने पर भी यह स्पष्ट दिखता है कि तिर्की जी ने अनुभवों को न सिर्फ देखा है, बल्कि पूरी तरह जिया है। हिंदी संस्करण के लिए तो मित्र तिर्की जी को अतिरिक्त बधाई बनती है, क्योंकि अपनी भाषा में कहने की जोखिम और ईमानदार अभिव्यक्ति कई गुना संवेदनशील हो जाती है।

    पाठकों को पुस्तक निश्चित ही आनंदित करेगी और लेखक की हिम्मत, सोच तथा लेखकीय ईमानदारी को भरपूर सहयोग मिलेगा। ऐसा लगता है, उनके पिटारे में अभी कई सांप बाकी हैं, जिनके जहरीले दांत निकाल दिए गए हैं और जिनकी फुफकार आने वाली है! तिर्की जी की लेखनी को सलाम, शुभकामनाएँ और भरपूर साधुवाद।

    – प्रभात दत्त झा,
    बिलासपुर

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