हिमालय की दुर्गम घाटियों की सर्द रात। घना अंतहीन जंगल। कुछ अनजान यात्रियों से भरी एक बस और एक रास्ता जो कभी मंज़िल तक नहीं पहुँचता। जैसे-जैसे स्नोफॉल बढ़ती है, वैसे-वैसे कुछ डरावनी परछाइयाँ गहरी होती जाती हैं। कोई हलचल, कोई गुर्राहट, जंगल में कुछ है जो जाग चुका है।
इस अरण्य में कोई साँसे ले रहा है, उसे उन्हीं का इंतजार था।
‘भाग चुड़ैल भाग’, ‘ज़ीरो डिग्री’ जैसी हॉरर किताबों के लेखक देवेन्द्र पांडेय का नया हॉरर एडवेंचर कथानक।
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