वरदा और जैकब को पता ही नहीं चला कि कब वे एक दूसरे के नज़दीक आ गये।
वे शादी करना चाहते थे लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं दिख रहा था।
पर दिल के हाथों दोनों मजबूर थे।
दिल एक ऐसा मदारी बन गया था जो उन्हें नचा रहा था। वरदा अपनी उलझनों में घिरी जी रही थी। क्या थीं उसकी उलझनें?
क्या दोनों का प्यार अपनी मंज़िल तक पहुँच पाया?
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