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भटके हुए | Bhatke Hue
अनाथ आश्रम में ज़िंदगी बिताने वाले बेरोजगार आनंद को कोई क्यों पच्चीस हजार देने को तैयार हो गया? एक ही शक्ल के दो लोग क्या जुड़वाँ थे? आनंद की कोई पहचान नहीं थी, पर क्या हुआ जब उसे किसी और की पहचान मिल गयी? उसके हमशक्ल की? क्या आनंद सचमुच अनाथ और अकेला था? कौन लोग थे जो आशा और आनंद की जान के पीछे थे? क्या मकसद था उनका? क्या आनंद उनके रहस्य तक पहुँच पाया? क्या उसकी भटकी हुई ज़िंदगी को किनारा मिला? तमाम सवालों के जवाब के लिए पढ़िए – चंदर का रोचक और रहस्य से परिपूर्ण उपन्यास भटके हुए
चन्दर हिन्दी अपराध साहित्य में एक प्रसिद्ध नाम हुआ है। यह मशहूर हिन्दी साहित्यकार आनंद प्रकाश जैन और उनकी पत्नी चन्द्रकान्ता जैन का लेखकीय नाम था। इस नाम से इन्होने कई जासूसी कृतियों की रचना की थी।
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