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गंगा के शांत किनारों से शुरू होती यह कहानी धीरे-धीरे ऐसे खौफनाक खेल में बदल जाती है, जहाँ ठगों, डाकुओं और चालाक अपराधियों का राज चलता है।
मुंशी हरप्रकाश लाल की साधारण यात्रा कब एक खतरनाक अपराध-जाल में फँस जाती है, उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। इसके बाद शुरू होता है दाँव पेंच का खेल।
पढ़ें भारत के पहले अपराध कथा लेखक गोपाल राम गहमरी का रोमांचक उपन्यास ‘भोजपुर की ठगी’ (Bhojpur Ki Thagi)।
1866 ई को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के गहमर में जन्में गोपाल राम गहमरी पत्रकार, लेखक और सम्पादक थे। उन्हें हिंदी का प्रथम जासूसी लेखक भी माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन में 200 से ऊपर उपन्यास और सैकड़ों कहानियाँ लिखीं। उन्होंने कई बांग्ला रचनाओं का हिंदी में अनुवाद भी किया।
उन्होंने ‘भारत भूषण’, ‘श्री वेंकटेश्वर समाचार’, ‘भारत मित्र’, गुप्त कथा इत्यादि का सम्पादन भी कुछ समय तक किया। वे 38 वर्षों (1900-1939) तक हिंदी जासूसी पत्रिका ‘जासूस’ का प्रकाशन करते रहे।
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