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युद्ध की गहरी कंदरा में,लालसाओं के डोलाइन के पीछे,राजनीति के चूना पत्थरों से निर्मित कठोर शैल के अनगढ़ आवरण में बरसों से बंद, अपनी प्राकृतिक और कलात्मक कांति से दीप्त नाजुक मोती सा ये सुंदर देश वियतनाम, अपनी स्निग्ध आभा की छटा दुनिया के समक्ष उस तरह नहीं बिखेर पाया जिसका वो हकदार था।
सीप में बंद पड़े इस अनादृत नायाब मोती को हौले से सीप से बाहर निकाल अपनी हथेली पर रख उसकी एक झलक सबको दिखाने की चाहना का नाम ही है ये यात्रा वृत्तांत!
हाँ मैं स्वीकार करती हूँ मैं ही पहले पास नहीं आई तुम्हारे, इसलिए हमारे बीच दूरियाँ बनी रही। मैंने ही आने में बहुत देर कर दी वरना…
इतने भी दूर नहीं थे तुम!
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित समसामयिक आलेखों, कविताओं, कहानियों, संस्मरणों एवं हास्य व्यंग्य की अनेक रचनाओं के साथ ही
ऑनलाइन डेटिंग अप्रॉक्स 25:35 ( उपन्यास )
इस पार मैं ( काव्य संग्रह )
दिल की खिड़की में टँगा तुर्की ( यात्रा वृत्तांत )
इन तीन किताबों के ज़रिए इस संसार को अपने नज़रिए से थोड़ा सामने रखने के बाद बस इतना ही कि अभी मैं उस पुल की भूमिका में हूँ जो वियतनाम और आपके बीच का फासला मिटा रही है।
इसके सिवाय अपनी सारी भूमिकाएँ गिनाना मैं अभी मुल्तवी करती हूँ। इस चाहना के साथ कि इस पुल से गुज़रने के बाद वियतनाम की भूमि पहुँचने पर वहाँ बिताया गया आपका कुछ समय सार्थक और सानंद व्यतीत होगा।
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