किताब : कचहरीनामा
लेखक : मनीष भार्गव
प्रकाशक : सन्मति पब्लिकेशन
पेज : 126
बहुत कम ऐसे लेखक हैं मेरी लिस्ट में जिनकी किताब को पढ़ने का इंतजार किया है। मनीष भार्गव उनमें से एक हैं। इनकी पहली किताब ” बेरंग लिफाफा ” पढ़कर ही इनकी लेखनी का मुरीद हो गया था। पिछले कुछ महीनों में कई बार इनको डायरेक्ट मैसेज कर के पूछ लिया था कि सर अगली किताब कब आ रही है।
कचहरीनामा एक कहानी संग्रह के रूप में है जिसका कवर पेज ही पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है। इस किताब में जो कहानियां हैं वो कोई काल्पनिक कहानी नहीं है बल्कि हमारे देश के सरकारी सिस्टम का आइना है। सरकारी सिस्टम में काम करने वाले लेखक के बहुत सारे अनुभव इस किताब के माध्यम से बाहर आए हैं। किताब पढ़कर लगता है इस सरकारी सिस्टम में जो भी खामी है जिसका जिक्र लेखक ने अलग अलग कहानियों के माध्यम से किया है उस खामी के जिम्मेदार हम भी है । आठ कहानियों की इस किताब ने मुझे कहानी ” सफर ( सीमा के आर पार ) बहुत मार्मिक लगी । इस कहानी में देश के बटवारे कर समय पाकिस्तान से भारत आए एक बुजुर्ग की कहानी है जो कि तब से लेकर अब तक के समय को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाती है। एक और कहानी ” रिटायरमेंट ” मुझे बहुत अच्छी लगी । सरकारी सिस्टम में काम करने वाले सभी लोगों को यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए । पद के घमंड में चूर लोग जब रिटायर होते हैं तो क्या होता है इसका वर्णन बखूबी किया गया है। एक अन्य कहानी ” सीमांकन ” में इस देश के गांव और यहां के तहसील से जुड़े मुद्दे पढ़कर अपने आप में झांकने का मौका मिलता है। अन्य सभी कहानियां भी देश से जुड़े जरूरी मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए है। किताब पढ़ते हुए कुछ पंक्तियां जो अच्छी लगी जैसे –
1. घर रहने वालों से ही बनता है दीवारों से नहीं।
2. एक बाप की अंतिम इच्छा भी उसके बेटे की सुरक्षा होती है।
3. सच सुनने से अंहकार को ठेस जल्दी पहुंचती है।
हिंदी के पाठकों से अनुरोध है कि ” कचहरीनामा ” जरूर पढ़ें। देश के किसी भी सरकारी सिस्टम में काम कर रहे लोगों को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए जिससे की आपको अपनी कार्य शैली समझने और बदलने में मदद मिले । किताब amazon और flipkart पर आ गई है। धन्यवाद।
– अनुराग वत्सल
( नई वाली हिंदी )
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’Kachahari nama’, सरकारी कार्यालय व जीवन के आम अनुभवों पर आधारित है, जिसे पढ़कर आप अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ देखेंगे ही नहीं बल्कि जिएँगे भी।
anurag.eib (verified owner) –
समीक्षा किताब की
किताब : कचहरीनामा
लेखक : मनीष भार्गव
प्रकाशक : सन्मति पब्लिकेशन
पेज : 126
बहुत कम ऐसे लेखक हैं मेरी लिस्ट में जिनकी किताब को पढ़ने का इंतजार किया है। मनीष भार्गव उनमें से एक हैं। इनकी पहली किताब ” बेरंग लिफाफा ” पढ़कर ही इनकी लेखनी का मुरीद हो गया था। पिछले कुछ महीनों में कई बार इनको डायरेक्ट मैसेज कर के पूछ लिया था कि सर अगली किताब कब आ रही है।
कचहरीनामा एक कहानी संग्रह के रूप में है जिसका कवर पेज ही पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है। इस किताब में जो कहानियां हैं वो कोई काल्पनिक कहानी नहीं है बल्कि हमारे देश के सरकारी सिस्टम का आइना है। सरकारी सिस्टम में काम करने वाले लेखक के बहुत सारे अनुभव इस किताब के माध्यम से बाहर आए हैं। किताब पढ़कर लगता है इस सरकारी सिस्टम में जो भी खामी है जिसका जिक्र लेखक ने अलग अलग कहानियों के माध्यम से किया है उस खामी के जिम्मेदार हम भी है । आठ कहानियों की इस किताब ने मुझे कहानी ” सफर ( सीमा के आर पार ) बहुत मार्मिक लगी । इस कहानी में देश के बटवारे कर समय पाकिस्तान से भारत आए एक बुजुर्ग की कहानी है जो कि तब से लेकर अब तक के समय को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाती है। एक और कहानी ” रिटायरमेंट ” मुझे बहुत अच्छी लगी । सरकारी सिस्टम में काम करने वाले सभी लोगों को यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए । पद के घमंड में चूर लोग जब रिटायर होते हैं तो क्या होता है इसका वर्णन बखूबी किया गया है। एक अन्य कहानी ” सीमांकन ” में इस देश के गांव और यहां के तहसील से जुड़े मुद्दे पढ़कर अपने आप में झांकने का मौका मिलता है। अन्य सभी कहानियां भी देश से जुड़े जरूरी मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए है। किताब पढ़ते हुए कुछ पंक्तियां जो अच्छी लगी जैसे –
1. घर रहने वालों से ही बनता है दीवारों से नहीं।
2. एक बाप की अंतिम इच्छा भी उसके बेटे की सुरक्षा होती है।
3. सच सुनने से अंहकार को ठेस जल्दी पहुंचती है।
हिंदी के पाठकों से अनुरोध है कि ” कचहरीनामा ” जरूर पढ़ें। देश के किसी भी सरकारी सिस्टम में काम कर रहे लोगों को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए जिससे की आपको अपनी कार्य शैली समझने और बदलने में मदद मिले । किताब amazon और flipkart पर आ गई है। धन्यवाद।
– अनुराग वत्सल
( नई वाली हिंदी )