राज ऋषि शर्मा
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Pal Bhar Ki chhaanv | पल भर की छाँव की विषय वस्तु ऐसी है कि एक बार जब आप इसे पढ़ना शुरू करते हैं तो फिर इसे समाप्त किये बिना रह ही नहीं सकते। यह एक उपन्यास ही नहीं एक ऐसा संस्मरणात्मक वृत्तांत भी है जो कि काल्पनिक होते हुए भी सत्य है। सत्य होते हुए भी काल्पनिक ! सब कुछ देखा, सुना, पढ़ा तथा अनुभव किया हुआ जैसा है। जिस पर प्राचीन काल से ही विश्वास किया जाता आ रहा है। ऐसी ही धारणा अन्य धर्मग्रंथों तथा जन साधारण की भी रही है तथा यह सब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तर्कसंगत प्रमाणित हो रहा है। इसी अवधारणा को परिलक्षित करते हुए इस उपन्यास की रचना की गई है। इसके रचनात्मक लेखन से पाठक को एक प्रकार के रचनात्मक भ्रम जाल में उलझा कर एक विश्वसनीय सत्य से अवगत करवाना है। इस की रचना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मनोरंजन के साथ परालौकिक विचारधारा से संबंधित विश्वसनीय तथ्यों से परिचय करवाना ही है।
राज ऋषि शर्मा हिंदी, डोगरी और अंग्रेजी भाषाओं के बहुमुखी प्रतिभाशाली लेखक, पत्रकार और चित्रकार हैं। उन्होंने अब तक विभिन्न विधाओं में 29 पुस्तकें लिखी हैं, जिन्हें पाठकों ने खूब सराहा है। वे मुख्य रूप से हिंदी में लिखते हैं। उनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं और आकाशवाणी पर भी प्रसारित की गई हैं।
1975 में उन्होंने ‘महक’ और 2022 में ‘महकती वाटिका’ नामक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया। 1977 में उन्होंने ‘राजर्षि कल्चर क्लब’ का भी संचालन किया। वर्तमान में, वे ‘महकती वाटिका’ नामक काव्य संग्रहों की श्रृंखला का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं।
राज ऋषि शर्मा को ‘साहित्यालंकार’ और ‘साहित्य श्री’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
| Weight | 180 g |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 13 × 2 cm |
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