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Sab Achchha Hoga
राशिका देवी और डॉक्टर सोनाली नदी के उन दो किनारों की तरह थे जिनका मिलना सबको असम्भव सा लगता था।
एक तरफ राशिका देवी लंबी-चौड़ी भारी-भरकम गरजैल और दबंग महिला थीं जिनसे अस्पताल का हर कर्मचारी डरता था। तो वहीं दूसरी थी जिसके सामने अस्पताल का कोई भी कर्मचारी, फिर वो डॉक्टर हो या नर्स, नहीं टिकना चाहता था।
वहीं दूसरी ओर डॉ. सोनाली एक दुबली-पतली छोटे कद की कमजोर सी दिखने वाली युवती थी जिसे देखकर लगता ही नहीं था कि वो डॉक्टर है। उसका रोना तो बच्चे भी नहीं मानते थे। वो बड़े कहाँ ही मानते। सभी को लगता था कि वो डॉक्टर बनने के काबिल नहीं है।
ऐसे में जब डॉक्टर सोनाली को राशिका देवी का ख़याल रखने को कहा गया तो सभी की आशंका थी कि ये अस्पताल की चाल थी डॉक्टर सोनाली को निकलवाने की।
सभी जानते थे कि राशिका देवी के सामने डॉक्टर सोनाली टिकने नहीं वाली थी। उससे गलती होनी ही थी और इसी बहाने से डॉक्टर सोनाली को निकाल दिया जाना था।
आखिर क्या हुआ जब डॉक्टर सोनाली और राशिका देवी आमने सामने आये?
क्या डॉक्टर सोनाली राशिका देवी का इलाज ढंग से कर पायी या अस्पताल वालों की आशंका सही साबित हुई?
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