Hindyugm Prakashan
Original price was: ₹249.₹224Current price is: ₹224. (-10%)
हर क़त्ल के पीछे एक मंशा होती है, पैसा, नाकामयाब इश्क़, बदला, शोहरत या सत्ता का लालच। यूँ ही कोई उठ कर किसी का क़त्ल नहीं कर देता। क़त्ल एक कॉम्पलेक्स्ड खेल है।
दिल्ली के अधेड़ करोड़पति बिजनेसमैन श्याम का क़त्ल हो गया है। एक हिल स्टेशन के रेजॉर्ट में, जहाँ वह कल अपने से तीस साल छोटी लड़की मायरा के साथ आया था। मायरा सोचती है कि श्याम उसका शुगर डैडी है, उसे चाहता है, उससे शादी करना चाहता है। पर उस भटकी हुई और टूटे परिवार से निकली लड़की को यह नहीं पता कि उसी रेजॉर्ट में उसकी फ़िरंगी पहली दिवंगत पत्नी की बेटी, पैसे की लालची दूसरी पत्नी अपने बेटे के साथ और होने वाली रहस्ममई तीसरी पत्नी भी मौजूद हैं। और सबके पास है श्याम का क़त्ल करने की तगड़ी वजहें।
कौन सुलझाएगा यह मिस्ट्री? आप? तो शामिल हो जाइए इस रोमांचक और पल-पल बदलते समीकरणों को सुलझाने की दौड़ में… शुगर डैडी (Sugar Daddy) जयंती रंगनाथन का नवीनतम् उपन्यास…
चार उपन्यास—‘आसपास से गुज़रते हुए’, ‘ख़ानाबदोश ख़्वाहिशें’, ‘औरतें रोती नहीं’, ‘एफ. ओ. ज़िंदगी’ और तीन कहानी-संग्रह—‘एक लड़की-दस मुखौटे’, ‘गीली छतरी’, ‘रूह की प्यास’ प्रकाशित। संस्मरणात्मक उपन्यास ‘बॉम्बे मेरी जान’, कहानी-संकलनों—‘30 शेड्स ऑफ़ बेला’ और ‘कामुकता का उत्सव’ का संपादन। ज़ी टीवी और सोनी के लिए सीरियल लेखन। स्टोरीटेल ऑडियो बुक्स के लिए ‘कुछ लव जैसा’, ‘रेनबो प्लेनेट’, ‘बाला और सनी’ सीरीज़। एचटी स्मार्ट कास्ट के लिए नियमित कहानियों का पॉडकास्ट।
धर्मयुग से करियर की शुरुआत। सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविज़न, महिलाओं की पत्रिका ‘वनिता’ में संपादक, अमर उजाला अख़बार में फ़ीचर एडिटर एवं नंदन पत्रिका में संपादक पद पर काम करने के बाद इन दिनों हिंदुस्तान अख़बार में एक्ज़ीक्युटिव एडिटर।
| Weight | 183 g |
|---|---|
| Dimensions | 20 × 14 × 2 cm |
| Number of Pages | 216 |


Reviews
There are no reviews yet