स्टॉप प्रेस को मैं करीब तीस साल बाद पढ़ रहा था और मुझे कहानी का कुछ याद नहीं था तो मेरे लिए तो ये नया उपन्यास जैसा ही था।
उपन्यास बेहतरीन है, यह कहने की जरूरत नहीं है।
साहित्य विमर्श को साल में कम से कम चार नए पुराने उपन्यास देने चाहिए, पाठक साहब के।
Rated 5 out of 5
Vijay Kumar Verma (verified owner)–
Front cover very good, good printing and matter with very low rate (₹199) thanks
Rated 1 out of 5
Gurbir Bhatia –
Hadn’t received yet and there is no communication whatsoever from the publisher.
UPI/SAHITYA VI/50200057317336/UPI/HDFC BANK/647247997587/ICIc86c79b9c9414f0ba491336d1d94eb 6d/- 199.00
एक जिद्दी पत्रकार!
एक संदिग्ध वारिस!
एक पूर्वाग्रहग्रस्त बिचौलिया!
और करोड़ों के विरसे की दौलत का खेल।
इस जुगलबंदी से जन्मी एक परफेक्ट कहानी।
लेकिन हर परफेक्ट कहानी पर पड़ा होता है,
झूठ का घना पर्दा!
‘ब्लास्ट’ के चीफ रिपोर्टर
सुनील चक्रवर्त्ती ने जब पर्दा फ़ाश शुरू किया तो खेल खतरनाक हो गया – कत्ल तक पहुँचा
स्टॉप प्रेस (Stop Press)
बेमिसाल मर्डर मिस्ट्री
साहित्य विमर्श प्रकाशन
की गौरवशाली प्रस्तुति
सुरेन्द्र मोहन पाठक का जन्म 19 फरवरी, 1940 को पंजाब के खेमकरण में हुआ था। विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय दूरभाष उद्योग में नौकरी कर ली। युवावस्था तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेखकों को पढ़ने के साथ उन्होंने मारियो पूजो और जेम्स हेडली चेज़ के उपन्यासों का अनुवाद शुरू किया। इसके बाद मौलिक लेखन करने लगे। सन 1959 में, आपकी अपनी कृति, प्रथम कहानी “57 साल पुराना आदमी” मनोहर कहानियां नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई।
आपका पहला उपन्यास “पुराने गुनाह नए गुनाहगार”, सन 1963 में “नीलम जासूस” नामक पत्रिका में छपा था। सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रसिद्ध उपन्यास असफल अभियान और खाली वार थे, जिन्होंने पाठक जी को प्रसिद्धि के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया। इसके पश्चात उन्होंने अभी तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
उनका पैंसठ लाख की डकैती नामक उपन्यास अंग्रेज़ी में भी छपा और उसकी लाखों प्रतियाँ बिकने की ख़बर चर्चा में रही। उनकी अब तक सवा तीन सौ से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका नवीनतम उपन्यास विमल सीरीज का ‘सुपर डॉन’ है।
उनसे smpmysterywriter@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है। पत्राचार के लिये उनका पता है : पोस्ट बॉक्स नम्बर 9426, दिल्ली – 110051.
MANISH PANDEY (verified owner) –
स्टॉप प्रेस को मैं करीब तीस साल बाद पढ़ रहा था और मुझे कहानी का कुछ याद नहीं था तो मेरे लिए तो ये नया उपन्यास जैसा ही था।
उपन्यास बेहतरीन है, यह कहने की जरूरत नहीं है।
साहित्य विमर्श को साल में कम से कम चार नए पुराने उपन्यास देने चाहिए, पाठक साहब के।
Vijay Kumar Verma (verified owner) –
Front cover very good, good printing and matter with very low rate (₹199) thanks
Gurbir Bhatia –
Hadn’t received yet and there is no communication whatsoever from the publisher.
UPI/SAHITYA VI/50200057317336/UPI/HDFC BANK/647247997587/ICIc86c79b9c9414f0ba491336d1d94eb 6d/- 199.00
Sahitya Vimarsh (store manager) –
Dispatched Sir. We have tried to reach you regarding transaction Id as there was a mismatch, but couldn’t connect. Mailed you as well. You can track your shipment here: https://panel.shipmozo.com/track-order/WKlTo3MeEDgYpZV5ZU8w?awb=369717294882
Rajendra Sen –
पाठक साहब के 1980 से 1995 तक की बुक्स ख़ास तौर पे विमल और सुनील के जरूर ही प्रिंट होना चाहिए, बहुत से मुझ जैसे पाठक अभी भी खोज कर रहे हैं।